Indian Penal Code, 1860
धारा 131
repealedAbetting mutiny, or attempting to seduce a soldier, sailor or airman from his duty
Whoever abets the committing of mutiny by an officer, soldier, sailor or airman, in the Army, Navy or Air Force of the Government of India or attempts to seduce any such officer, soldier, sailor or airman from his allegiance or his duty, shall be punished with imprisonment for life, or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह उपबंध 1860 के मूल भारतीय दंड संहिता में शामिल किया गया था, जिसे 1857 के भारतीय विद्रोह (जिसे अक्सर सिपाही विद्रोह कहा जाता है) के तुरन्त बाद ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन तैयार किया गया था, जब भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ बगावत की थी। औपनिवेशिक सरकार अपनी सशस्त्र सेनाओं के भीतर भविष्य के उठावों को रोकने के प्रति अत्यंत चिंतित थी और किसी को भी सैनिकों को अवज्ञा या विद्रोह के लिए उकसाने से रोकने हेतु कड़े कानून चाहती थी। यह कानून सैन्य अनुशासन और कमान शृंखला की रक्षा करता है, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यवस्था के लिए आवश्यक माना जाता है, और स्वतंत्र भारत की विधि-व्यवस्था में भी आंतरिक विध्वंस (सबवर्शन) से सशस्त्र बलों की सुरक्षा हेतु जारी है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा केवल उसी स्थिति में दंड देती है जब वास्तविक विद्रोह सफल हो जाए।
तथ्य: कानून न केवल विद्रोह के उकसावे को, बल्कि सैनिक को उसके कर्तव्य से फुसलाने के मात्र प्रयास को भी दंडित करता है—चाहे अंततः कोई विद्रोह हुआ ही न हो।
मिथक: केवल सैन्य कार्मिकों पर ही इस धारा के तहत अभियोग चलाया जा सकता है।
तथ्य: सिर्फ सैन्य के भीतर के लोग ही नहीं, कोई भी व्यक्ति—नागरिक या अन्य—जो सशस्त्र बलों के कार्मिकों को उकसाता है या कर्तव्य से फुसलाने का प्रयास करता है, इस धारा के तहत आरोपित किया जा सकता है।