Indian Penal Code, 1860
धारा 129
repealedPublic servant negligently suffering such prisoner to escape
Whoever, being a public servant and having the custody of any State prisoner or prisoner of war, negligently suffers such prisoner to escape from any place of confinement in which such prisoner is confined, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to three years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की उन व्यवस्थाओं (धारा 128-130) का भाग है जो राज्य कैदियों और युद्धबंदियों के फरार होने से संबंधित हैं—ऐसे कैदियों की श्रेणियाँ जिन्हें ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य प्राधिकार की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है। धारा 128 जानबूझकर या स्वेच्छा से भागने में सहायता करने को दंडित करती है, जबकि धारा 129 लापरवाह पर्यवेक्षण जैसे कम गंभीर, परंतु फिर भी गंभीर, अपराध को संबोधित करती है। यह भेद इस उपनिवेशकालीन चिंता को दर्शाता है कि राजनीतिक या सैन्य दृष्टि से महत्त्वपूर्ण कैदियों के संरक्षक उच्च सतर्कता मानकों पर खरे उतरें—और मात्र लापरवाही के लिए दंड, जानबूझकर मिलीभगत की तुलना में कम हो।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा तभी लागू होती है जब लोक सेवक ने जानबूझकर कैदी को भागने में मदद की हो।
तथ्य: यह धारा विशेष रूप से लापरवाह (असावधान, अनिच्छित) आचरण को कवर करती है। भागने में जानबूझकर या इच्छापूर्वक सहायता करने पर अलग प्रावधान, धारा 128 के तहत अधिक कड़ी सज़ा होती है।
मिथक: यह कानून किसी भी जेल में किसी भी कैदी की रखवाली पर लागू होता है।
तथ्य: यह धारा विशेष रूप से ‘राज्य कैदी’ और ‘युद्धबंदी’ पर लागू होती है—ये विशेष विधिक श्रेणियाँ हैं, सामान्य आपराधिक बंदियों पर लागू नहीं।