Skip to content
सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 127

repealed

Receiving property taken by war or depredation mentioned in sections 125 and 126

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

आईपीसी की धाराएँ 125 और 126 उन कृत्यों को अपराध ठहराती हैं जिनमें भारत सरकार के साथ शांति में रहने वाली एशियाई शक्ति के प्रदेश के विरुद्ध युद्ध छेड़ना या उस पर आक्रमण/लूटपाट करना शामिल है। धारा 127 इन धाराओं का पूरक है: यह उन व्यक्तियों को निशाना बनाती है जिन्होंने मूल अपराध नहीं किया, परंतु जानते-बूझते लूटी हुई संपत्ति को स्वीकार करके उससे लाभ उठाया। इससे एक खामी बंद होती है—वरना कोई व्यक्ति लूटी हुई संपत्ति से मुनाफा कमा सकता था, जिससे ऐसे माल का बाजार बनेगा और मूल अवैध कृत्यों को परोक्ष रूप से बढ़ावा मिलेगा।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल वही व्यक्ति दंडित होता है जो वास्तव में संपत्ति को लूटता है।

    तथ्य: धारा 127 उन सभी को भी दंडित करती है जो बाद में वह संपत्ति इस ज्ञान के साथ स्वीकार करते हैं कि वह धारा 125 या 126 में वर्णित अवैध कृत्यों से प्राप्त हुई है।

  • मिथक: आप यह कहकर दंड से नहीं बच सकते कि आपने संपत्ति के स्रोत के बारे में पूछताछ ही नहीं की।

    तथ्य: कानून यह अपेक्षा करता है कि आपको ‘ज्ञान’ हो कि संपत्ति निर्दिष्ट अपराधों में ली गई थी; यदि यह दिखाया जा सके कि आपको पता था, तो बाद में किया गया अज्ञान का दावा मदद नहीं करेगा।