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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 126

repealed

Committing depredation on territories of Power at peace with the Government of India

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान 1860 के मूल IPC में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान शामिल किया गया था, जब ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश क्राउन ने पड़ोसी देशी रियासतों, जनजातीय क्षेत्रों और विदेशी शक्तियों के साथ संधियाँ व शांति व्यवस्थाएँ बनाए रखी थीं। निजी व्यक्तियों या सशस्त्र समूहों द्वारा कभी-कभी सीमाएँ पार करके ऐसे मैत्रीपूर्ण क्षेत्रों में लूट या धावे किए जाते थे, जिससे सरकार की किरकिरी होती, कूटनीतिक संबंधों को क्षति पहुँचती या संघर्ष भड़क सकता था। इस धारा ने राज्य को ऐसी निजी सीमा-पार आक्रामकता को अपराध घोषित करने का अधिकार दिया, ताकि साधारण नागरिक या समूह शांति-प्रिय पड़ोसियों पर अपने हिंसक कृत्यों से देश को अनचाहे युद्धों या विवादों में न घसीट सकें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल सैनिकों या सैन्य बल पर लागू होती है।

    तथ्य: यह क़ानून किसी भी व्यक्ति पर लागू होता है, केवल सैनिकों पर नहीं—मैत्रीपूर्ण विदेशी क्षेत्र पर धावा बोलने वाले सामान्य नागरिक या निजी समूहों पर भी इसी धारा के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

  • मिथक: दंड के लिए धावा वास्तव में पूरा करना अनिवार्य है।

    तथ्य: क़ानून ‘लूट-आक्रमण (depredation)’ करने की मात्र तैयारी को भी दंडित करता है, यानी ऐसे धावे की योजना बनाना या उसकी व्यवस्था करना, भले ही धावा कभी हुआ न हो, दंडनीय है।