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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 123

repealed

Concealing with intent to facilitate design to wage war

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय VI का भाग है, जो राज्य के विरुद्ध अपराधों से संबंधित है, और जिसे ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन ने राजसत्ता के विरुद्ध विद्रोह और संगठित उठावों की आशंकाओं के प्रत्युत्तर में तैयार किया था। उद्देश्य केवल युद्ध छेड़ने वालों को नहीं, बल्कि उन लोगों को भी दंडित करना था जो ऐसी योजना के बारे में जानते हुए जानबूझकर या जानते-बूझते चुप रहकर या पर्दादारी करके उसकी सफलता में सहायता करते हैं, क्योंकि कभी-कभी मौन सक्रिय भागीदारी जितना ही ख़तरनाक हो सकता है। स्वतंत्रता के बाद ‘Government of India’ का अर्थ गणराज्य की संवैधानिक सरकार के रूप में समझा गया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल उन लोगों को दंडित करती है जो वास्तव में सरकार के खिलाफ लड़ते हैं।

    तथ्य: यह उन लोगों को भी दंडित करती है जो केवल युद्ध-योजना के ज्ञान को छिपाते हैं, यदि उनका छिपाव उस योजना को मदद पहुँचाता है—भले ही वे स्वयं कभी लड़ाई में शामिल न हों।

  • मिथक: दोषसिद्धि के लिए आपको युद्ध-योजना की सहायता करने का नीयतपूर्वक इरादा होना आवश्यक है।

    तथ्य: क़ानून उन स्थितियों को भी समेटता है जहाँ व्यक्ति को केवल इतना ज्ञान हो कि उसका छिपाव योजना की सहायता करने की ‘संभावना’ रखता है, भले ही सीधी नीयत न हो।