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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 124

repealed

Assaulting President, Governor, etc., with intent to compel or restrain the exercise of any lawful power

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारियों — राष्ट्रपति और राज्यपालों — को जबरदस्ती से सुरक्षा प्रदान करती है। संवैधानिक लोकतंत्र में, इन पदों पर आसीन व्यक्तियों को अपने अधिकारों (जैसे विधेयकों को मंजूरी देना, अधिकारियों की नियुक्ति करना, या कुछ मामलों में विवेकाधिकार का प्रयोग करना) का इस्तेमाल बिना शारीरिक धमकी या दबाव के करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यह प्रावधान इस विचार को प्रतिध्वनित करता है कि राज्य प्रमुख या राज्य सरकार के प्रमुख की गरिमा व स्वतंत्रता पर हमला, संवैधानिक व्यवस्था पर ही हमला है। इसका स्रोत ब्रिटिश-कालीन दंड संहिता के मसौदे में निहित था, जहाँ उद्देश्य संप्रभु प्राधिकार की रक्षा था; स्वतंत्रता के बाद इसे भारत की गणतांत्रिक संरचना के अनुरूप, निर्वाचित राष्ट्रपति और नियुक्त राज्यपालों की सुरक्षा के लिए ढाला गया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा तभी लागू होती है जब राष्ट्रपति या राज्यपाल को वास्तविक शारीरिक चोट पहुँची हो — यह कथन गलत है।

    तथ्य: कानून उन स्थितियों को भी कवर करता है जहाँ रोकने का प्रयास, भयादोहन, या बल का प्रदर्शन किया गया हो — वास्तविक चोट आवश्यक नहीं है; केवल वह धमकाने वाली हरकत, वह भी उचित आशय के साथ, पर्याप्त है।

  • मिथक: राज्यपाल के निर्णय के विरुद्ध शांतिपूर्ण विरोध इस कानून के दायरे में दंडनीय नहीं है।

    तथ्य: साधारण विरोध या आलोचना दंडनीय नहीं है; यह धारा खासतौर पर उस आपराधिक बल या उसकी धमकी को निशाना बनाती है जो किसी को उनके वैध अधिकारों के प्रयोग के लिए बाध्य करने या उससे रोकने के उद्देश्य से की जाए।