Indian Penal Code, 1860
धारा 113
repealedLiability of abettor for an effect caused by the act abetted different from that intended by the abettor
When an act is abetted with the intention on the part of the abettor of causing a particular effect, and an act for which the abettor is liable in consequence of the abetment, causes a different effect from that intended by the abettor, the abettor is liable for the effect caused, in the same manner and to the same extent as if he had abetted the act with the intention of causing that effect, provided he knew that the act abetted was likely to cause that effect.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारतीय दंड संहिता के उकसावे (Sections 107-120) संबंधी प्रावधान इस उद्देश्य से बनाए गए कि जो लोग अपराध में उकसाते, सहायता करते या साँठगाँठ करते हैं, वे केवल वैसा नहीं, जैसा उन्होंने सोचा था, बल्कि उसके यथार्थ परिणामों के लिए भी जवाबदेह हों। Section 113, Section 111 की उस तर्क-रेखा (उकसाए गए कृत्य के ‘संभाव्य परिणाम’ के लिए दायित्व) को उन स्थितियों तक बढ़ाता है जहाँ वास्तविक प्रभाव उकसाने वाले की मनसा से भिन्न होता है। विधायकों का उद्देश्य यह था कि उकसाने वाला केवल यह कहकर न बच निकले कि ‘मेरी मंशा कुछ और थी’, जबकि उसे वास्तव में उस वैकल्पिक, अधिक गंभीर परिणाम के पूर्वानुमेय जोखिम का ज्ञान था।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने Section 113 को Section 111 के साथ पढ़ते हुए रेखांकित किया है कि मात्र संभावना पर्याप्त नहीं—अभियोजन को यह सिद्ध करना होता है कि उकसाने वाले को वास्तविक ज्ञान था कि भिन्न प्रभाव, उकसाए गए कृत्य का संभाव्य परिणाम है, न कि केवल कल्पनीय। यह ज्ञान-आवश्यकता Section 113 को अधिक कड़े परोक्ष दायित्व से अलग करती है; यह उकसाने वाले की अपराधिता को संयोग नहीं, बल्कि उसकी दूरदृष्टि से जोड़ती है। भारतीय अदालतों ने इसे उन मामलों में लागू किया है जहाँ, उदाहरण के लिए, किसी उकसाने वाले ने केवल चोट पहुँचाने के इरादे से पिटाई को प्रोत्साहित किया, पर मृत्यु हो गई—तब इस बात की पड़ताल की गई कि क्या उकसाने वाले को ज्ञात था कि मृत्यु उस कृत्य का संभाव्य परिणाम थी।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: उकसाने वाला केवल उसी सटीक हानि के लिए दायी होता है, जिसका उसने इरादा किया था, अन्य किसी चीज़ के लिए नहीं।
तथ्य: Section 113 स्पष्ट करता है कि यदि उकसाने वाले को यह ज्ञात था कि कोई भिन्न और अधिक गंभीर प्रभाव संभाव्य परिणाम है, तो वह उस वास्तविक प्रभाव के लिए भी दायी होगा।
मिथक: कोई भी अप्रत्याशित परिणाम उकसाने वाले को दायी बना देता है, चाहे वह अजीबो-गरीब दुर्घटना ही क्यों न हो।
तथ्य: Section 113 के तहत दायित्व के लिए यह सिद्ध होना आवश्यक है कि उकसाने वाले को वास्तव में ज्ञान था कि भिन्न प्रभाव संभाव्य परिणाम है; केवल इतना नहीं कि वह संयोग से घटित हो गया।