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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 112

repealed

Abettor when liable to cumulative punishment for act abetted and for act done

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता के निर्माताओं ने, मैकाले के नेतृत्व में, उकसावे (अबेटमेंट) पर विस्तृत प्रावधानों की एक शृंखला (धाराएँ 108‑120) बनाई। धारा 111 कहती है कि यदि उकसावे का ‘संभावित परिणाम’ होकर कोई भिन्न कृत्य घटित हो जाए, तो उस भिन्न कृत्य के लिए भी उकसाने वाला दायित्वग्रस्त होगा। धारा 112 यह स्पष्ट करती है कि जब वह भिन्न कृत्य नियोजित कृत्य का स्थान नहीं लेता, बल्कि उसके साथ‑साथ होता है — अर्थात दोनों अपराध वास्तव में घटित होते हैं — तो उकसाने वाले को सिर्फ इसलिए ‘राहत’ नहीं मिलती कि एक ही उकसावे से दो अपराध हुए; प्रत्येक पृथक अपराध अपनी अलग सज़ा खींचता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अभिकर्ता को केवल उसी अपराध के लिए दंड मिलता है जिसकी उसने योजना बनाई थी, क्योंकि अतिरिक्त अपराध उसका विचार नहीं था।

    तथ्य: धारा 112, धारा 111 के साथ मिलकर, यह कहती है कि यदि अतिरिक्त कृत्य उकसावे का समझ में आने वाला (संभावित) परिणाम था और वह नियोजित कृत्य के साथ‑साथ हुआ, तो अभिकर्ता दोनों अपराधों के लिए अलग‑अलग रूप से दायित्वग्रस्त होगा।

  • मिथक: दोनों अपराधों के लिए दंड देना, उसी कृत्य के लिए दोहरी सजा देना नहीं है।

    तथ्य: यह धारा तभी लागू होती है जब दोनों कृत्य पृथक अपराध हों और वास्तव में घटित हुए हों — यह एक ही कृत्य के लिए दोहरी सजा नहीं, बल्कि दो अलग‑अलग कृत्यों के लिए अलग‑अलग सजा है।