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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 82

Presumption as to maps or plans made by authority of Government

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सरकारी जारी नक्शे (जैसे सर्वे नक्शे, भू-राजस्व अभिलेख, या सीमांकन मानचित्र) का संपत्ति विवादों, सीमा-निर्धारण मामलों और प्रशासनिक कार्यवाहियों में लगातार उपयोग होता है। प्रत्येक आधिकारिक नक्शे की प्रामाणिकता बार‑बार शून्य से सिद्ध करने की शर्त अव्यावहारिक होती और न्यायालयों की गति धीमी कर देती। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (Section 83) से आगे बढ़ाई गई यह व्यवस्था न्यायालयों को आधिकारिक नक्शों को प्रामाणिक और सही मानने का अनुमान लगाने देती है, जबकि मुकदमे के लिए विशेष रूप से बनाए गए नक्शों को इस अनुमान से बाहर रखकर हेरफेर से सुरक्षा भी देती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: न्यायालय में प्रयुक्त कोई भी नक्शा अपने‑आप सही माना जाता है।

    तथ्य: केवल सरकारी अधिकार से बनाए गए नक्शों को यह स्वचालित भरोसा (अनुमान) मिलता है। जो नक्शे विशेष रूप से मुकदमे के लिए बनाए गए हों, उनकी शुद्धता साक्ष्य से सिद्ध की जानी चाहिए।

  • मिथक: यह अनुमान का तात्पर्य है कि नक्शे को कभी चुनौती नहीं दी जा सकती।

    तथ्य: यह अनुमान खंडनीय है — कोई भी पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर दिखा सकता है कि आधिकारिक प्रतीत होने वाला नक्शा भी गलत है या वास्तव में सरकारी अधिकार से बना ही नहीं था।