Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023
धारा 166
Giving, as evidence, of document called for and produced on notice
When a party calls for a document which he has given the other party notice to produce, and such document is produced and inspected by the party calling for its production, he is bound to give it as evidence if the party producing it requires him to do so.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह नियम Indian Evidence Act, 1872 (धारा 163) से आता है, और लगभग शब्दशः Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 में आगे बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य यह रोकना है कि कोई पक्ष केवल किसी दस्तावेज़ के अस्तित्व का डर दिखाकर दूसरे पक्ष पर दबाव न बनाए, उसे निजी तौर पर देखकर अगर वह उसके पक्ष में न निकले तो चुपचाप छोड़ न दे। एक बार आपने दस्तावेज़ मंगवा लिया, देख लिया, और दूसरी ओर उसे अभिलेख में शामिल करना चाहे, तो न्यायसंगत यही है कि आप उसे दबाने के बजाय सच में साक्ष्य के रूप में रख दें।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
Indian Evidence Act की संबंधित धारा 163 के तहत न्यायालयों ने माना है कि केवल दस्तावेज़ का प्रस्तुत होना और उसका निरीक्षण हो जाना अपने-आप उसे साक्ष्य नहीं बना देता—उसे साक्ष्य के रूप में देने का दायित्व तभी उत्पन्न होता है जब प्रस्तुत करने वाला पक्ष इस पर ज़ोर देता है। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल जिज्ञासावश या सीमित प्रयोजन से किया गया निरीक्षण निरीक्षणकर्ता पक्ष को बाध्य नहीं करता, जब तक कि प्रस्तुत करने वाला पक्ष विशेष रूप से उसे साक्ष्य के रूप में प्रदर्शित करने के लिए न कहे।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: केवल नोटिस के जवाब में दस्तावेज़ प्रस्तुत हो जाने मात्र से वह अपने-आप साक्ष्य बन जाता है।
तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि केवल प्रस्तुत कर देना उसे साक्ष्य नहीं बनाता—वह तभी साक्ष्य बनता है जब प्रस्तुत करने वाला पक्ष इस बात पर ज़ोर दे कि दूसरा पक्ष उसे साक्ष्य के रूप में दाखिल करे।
मिथक: एक बार आपने दस्तावेज़ का निरीक्षण कर लिया, तो आपको हमेशा उसे साक्ष्य के रूप में उपयोग करना ही होगा, चाहे कोई आपसे इसके लिए कहे या न कहे।
तथ्य: यह दायित्व तभी उत्पन्न होता है जब प्रस्तुत करने वाला पक्ष विशेष रूप से निरीक्षण करने वाले पक्ष से उसे साक्ष्य के रूप में देने की माँग करे।