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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 164

Right of adverse party as to writing used to refresh memory

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

गवाहों को कभी-कभी गवाही देते समय अपनी स्मृति ताज़ा करने के लिए नोट्स, डायरी या अभिलेख देखने की अनुमति होती है। यह प्रावधान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए है: यदि एक पक्ष किसी दस्तावेज़ से गवाह की स्मृति को उकसाने का लाभ लेता है, तो दूसरे पक्ष को उससे अनभिज्ञ नहीं रखा जा सकता। पारदर्शिता और गवाही की विश्वसनीयता परखने का अधिकार निष्पक्ष मुक़दमे के मूल तत्व हैं, इसलिए विपरीत पक्ष को उस लिखित सामग्री का निरीक्षण करने और उसकी विषयवस्तु, शुद्धता या स्रोत पर गवाह को चुनौती देने का अवसर मिलता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पूर्ववर्ती व्यवस्था (Indian Evidence Act, 1872 की Section 161) के अधीन, भारतीय न्यायालयों ने निरन्तर माना कि ऐसी लिखित सामग्री के निरीक्षण और उस पर जिरह का अधिकार महज़ विवेकाधीन शिष्टाचार नहीं, बल्कि विपरीत पक्ष का मूल्यवान अधिकार है, क्योंकि इससे परखा जा सकता है कि गवाह सच में स्मृति ताज़ा कर रहा है या अनुचित रूप से किसी और के कथन पर निर्भर है। न्यायालयों ने बल दिया है कि इस अधिकार से वंचित करना निष्पक्ष सुनवाई को प्रभावित कर सकता है, यद्यपि जिरह का दायरा सामान्यतः उसी हिस्से तक सीमित रहता है जिसका उपयोग स्मृति ताज़ा करने में किया गया हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सिर्फ़ न्यायाधीश ही गवाह द्वारा उपयोग की गई लिखित सामग्री देख सकता है।

    तथ्य: यदि विपरीत पक्ष माँगे तो उसे भी उस लिखित सामग्री को देखने का अधिकार है, और वह उस पर गवाह से प्रश्न कर सकता है।

  • मिथक: विरोधी पक्ष दस्तावेज़ देखने के बाद गवाह से हर विषय पर जिरह कर सकता है।

    तथ्य: न्यायालयों ने सामान्यतः इस अधिकार को उसी लिखित सामग्री से सम्बद्ध प्रश्नों तक सीमित माना है जिसका उपयोग स्मृति ताज़ा करने हेतु हुआ, न कि असंबंधित मुद्दों पर खुली-अवधि की जिरह के रूप में।