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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 125

Witness unable to communicate verbally

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय साक्ष्य कानून के पहले के प्रावधान (पुराने Indian Evidence Act, 1872 की धारा 119) में भी बोलने में असमर्थ गवाहों को लिखकर या संकेतों से गवाही देने की अनुमति थी। Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 ने इस सिद्धांत को बनाए रखा, पर एक आधुनिक सुरक्षा जोड़ी: जब गवाह बिल्कुल भी वाचिक रूप से संवाद नहीं कर सकता (जैसे कुछ विकलांगताओं वाले व्यक्ति), तो अब न्यायालय को प्रशिक्षित दुभाषिए या विशेष शिक्षक की भागीदारी सुनिश्चित करनी होती है और बयान दर्ज करने की वीडियोग्राफी करनी होती है। यह संशोधन विकलांगता अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता और भिन्न तरीके से संवाद करने वाले गवाहों से गवाही लेने की विश्वसनीय व सत्यापन योग्य पद्धतियों की आवश्यकता को दर्शाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: लिखित या संकेतों से दी गई गवाही, बोले हुए बयान से कमज़ोर या कम विश्वसनीय मानी जाती है।

    तथ्य: कानून कहता है कि ऐसी गवाही ‘मौखिक साक्ष्य मानी जाएगी’, यानी उसकी कानूनी हैसियत बोले हुए बयान के बराबर है।

  • मिथक: कोई भी मित्र या रिश्तेदार, वाचिक संवाद करने में असमर्थ गवाह के लिए दुभाषिए के रूप में काम कर सकता है।

    तथ्य: कानून विशेष रूप से यह अपेक्षा करता है कि न्यायालय दुभाषिए या विशेष शिक्षक की व्यवस्था करे, ताकि अनौपचारिक मदद के बजाय योग्य सहायता सुनिश्चित हो।