Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023
धारा 112
Burden of proof as to relationship in the cases of partners, landlord and tenant, principal
When the question is whether persons are partners, landlord and tenant, or principal and agent, and it has been shown that they have been acting as such, the burden of proving that they do not stand, or have ceased to stand, to each other in those relationships respectively, is on the person who affirms it.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह नियम भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की पुरानी धारा 114 से आया है, जिसे भाषा के आधुनिकीकरण के साथ भरतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में आगे बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि साझेदारी, किरायेदारी या प्रत्यायुक्ति जैसे संबंध अक्सर लोगों के व्यवहार से आसानी से दिख जाते हैं (जैसे साथ मिलकर व्यवसाय चलाना, किराया देना, किसी के behalf पर काम करना), पर केवल औपचारिक दस्तावेजों से सिद्ध करना कठिन होता है। न्यायालयों ने तर्क दिया कि एक बार आचरण से कार्यशील संबंध स्थापित हो जाए, तो जिसे उस संबंध का इन्कार करना हो या उसके समाप्त होने का कहना हो, उसी पर परिवर्तन सिद्ध करने का भार रखना अधिक न्यायसंगत है, बजाय इसके कि दूसरी तरफ़ से नकारात्मक बात सिद्ध करवाई जाए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
पूर्ववर्ती प्रावधान (धारा 114, साक्ष्य अधिनियम 1872) के अंतर्गत, भारतीय न्यायालयों ने लगातार माना कि आचरण का प्रमाण—जैसे लाभ बाँटना, किराया देना, या किसी के निर्देश पर कार्य करना—उस संबंध की विधिक धारणा को शुरू करने के लिए पर्याप्त है। एक बार ऐसा आचरण दिख जाने पर साक्ष्य का भार उस पक्ष पर स्थानांतरित हो जाता है जो संबंध का इन्कार करता है या समाप्ति का दावा करता है। न्यायालयों ने इसे किरायेदारी विवादों में (यह तय करने हेतु कि निष्कासन या समर्पण के दावे के बावजूद क्या व्यक्ति अब भी किरायेदार है) और साझेदारी विवादों में (यह तय करने हेतु कि सेवानिवृत्ति या विसर्जन के दावों के बावजूद क्या कोई अब भी साझेदार है) लागू किया है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: आपको साझेदारी, किरायेदारी या प्रत्यायुक्ति सिद्ध करने के लिए हमेशा लिखित समझौते की आवश्यकता होती है।
तथ्य: न्यायालय केवल आचरण से ही ऐसे संबंध निष्कर्षित कर सकते हैं; एक बार आचरण प्रदर्शित हो जाए, तो लिखित साक्ष्य की परवाह किए बिना, साक्ष्य का भार उस पक्ष पर शिफ्ट हो जाता है जो संबंध का इन्कार करता है।
मिथक: यह प्रावधान लोगों को हमेशा के लिए किसी संबंध में बाँध देता है।
तथ्य: यह केवल साक्ष्य का भार स्थानांतरित करता है; व्यक्ति अब भी यह सिद्ध कर सकता है कि संबंध समाप्त हो गया, किंतु उसे सक्रिय रूप से वह प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।