Skip to content
सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 106

Burden of proof as to particular fact

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह साक्ष्य-कानून का एक आधारभूत नियम है जो Indian Evidence Act, 1872 (Section 101) से मिला था और अब Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 में पुनः अधिनियमित है। इसका उद्देश्य यह है कि मुकदमे अटकलबाजी न बनें: क्योंकि अदालतें स्वयंपरीक्षण करके तथ्य नहीं खोज सकतीं, कानून को यह स्पष्ट नियम चाहिए कि सबूत कौन लेकर आएगा। तर्क व्यावहारिक है—जो व्यक्ति कोई तथ्य जताता है, उसके पास आम तौर पर उस सूचना तक बेहतर पहुँच होती है या उसे उसके बारे में अधिक जानकारी होने की वजह होती है; इसलिए निष्पक्षता और दक्षता की मांग है कि वही अपना दावा सिद्ध करे, न कि दूसरे पक्ष से यह अपेक्षा की जाए कि वह पहले उसे गलत साबित करे।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने लगातार माना है कि यह सुविधा और तर्क पर आधारित एक सामान्य नियम है, कोई ऐसा कठोर तकनीकी प्रावधान नहीं जो अपने आप में मुकदमा निपटा दे। इसका महत्व मुख्यतः मुकदमे की शुरुआत में रहता है, ताकि यह तय हो कि पहले साक्ष्य कौन देगा; एक बार दोनों पक्ष साक्ष्य रख दें, तो अदालत बोझ-ए-सबूत को यांत्रिक ढंग से लागू करने के बजाय समस्त सामग्री को साथ रखकर तौलती है। अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सामान्य नियम विशेष वैधानिक प्रावधानों (जैसे कुछ कानूनों में निर्धारित प्रत्याभूतियाँ) के आगे झुकता है, जो विशेष तथ्यों के लिए किसी खास पक्ष पर बोझ स्थानांतरित कर देते हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि अभियोजन को आपराधिक मुकदमे में हर एक तथ्य—यहाँ तक कि वे तथ्य भी जो केवल अभियुक्त ही जानता हो या जिनका दावा वह ही करता हो—सिद्ध करने होते हैं।

    तथ्य: सामान्य नियम यह है कि जो व्यक्ति कोई तथ्य अभिव्यक्त करता है, वही उसे सिद्ध करेगा। यदि अभियुक्त कोई विशिष्ट दावा उठाता है (जैसे अलीबी), तो उस विशिष्ट तथ्य को सिद्ध करने का बोझ अभियुक्त पर होता है, जबकि अभियोजन पर अब भी समग्र अपराध को संदेह से परे सिद्ध करने का दायित्व बना रहता है।

  • मिथक: यह नियम हमेशा तय नहीं करता कि मुकदमा कौन जीतेगा।

    तथ्य: अदालतें इसे मुख्यतः इस रूप में देखती हैं कि पहले साक्ष्य किसे लाने हैं। एक बार दोनों पक्षों के साक्ष्य अभिलेख पर आ जाएँ, तो अदालत सबको एक साथ परखकर निष्कर्ष पर पहुँचती है।