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सं Samvidhan

Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023

धारा 102

Who may give evidence of agreement varying terms of document

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सामान्यतः, जब दो लोग अपना समझौता लिखित रूप में कर देते हैं, तो न्यायालय उन्हें मौखिक दावों से उसके विपरीत कहने नहीं देते — इससे लिखित अनुबंध भरोसेमंद रहता है। पर यह कड़ा नियम मुख्यतः इसलिए है कि वही पक्ष बाद में यह झूठ न बोलें कि उनका ‘असली’ मतलब कुछ और था। बाहरी लोग, जो उस सौदे का हिस्सा नहीं थे और जिन्हें यह तय करने का मौका नहीं मिला कि क्या लिखा जाए, उनके असली हितों को चोट पहुँचे तो उन्हें दूसरों के कागज़ात से बाँध देना अनुचित है। यही न्याय संगत अपवाद यह प्रावधान देता है (पुराने Indian Evidence Act, 1872 की Section 99 से ग्रहण किया गया)।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: कोई भी व्यक्ति कभी भी लिखित अनुबंध का मौखिक साक्ष्य से खंडन नहीं कर सकता।

    तथ्य: यह नियम कड़ाई से केवल अनुबंध के पक्षकारों के बीच लागू होता है; जिन बाहरी व्यक्तियों के हित प्रभावित होते हैं, वे उसी समय हुई साइड-अग्रीमेंट का मौखिक या अन्य साक्ष्य पेश कर सकते हैं।

  • मिथक: कोई भी अनजान व्यक्ति इस नियम का सहारा लेकर किसी भी अनुबंध को चुनौती दे सकता है।

    तथ्य: केवल वे ही व्यक्ति (या उनके विधिक प्रतिनिधि) जिनके अपने वास्तविक हित उस दस्तावेज़ से प्रभावित होते हैं, इस अपवाद का उपयोग कर सकते हैं — महज़ जिज्ञासावश असंबंधित तीसरे लोग नहीं।