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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 91

Power to take bond or bail bond for appearance

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान भारतीय दंड प्रक्रिया की एक पुराने समय से चली आ रही विशेषता (पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 88) को आगे बढ़ाता है, जिसका उद्देश्य गैरज़रूरी कागज़ी कार्रवाई और न्यायालय का समय बचाना है। जब व्यक्ति पहले से उपस्थित है, तो अगली तारीख के लिए उसे फिर से औपचारिक रूप से समन भेजने या गिरफ़्तार करने की व्यावहारिक ज़रूरत नहीं रहती; इसके बजाय न्यायालय उससे यह साधारण आश्वासन (बंधपत्र) ले सकता है कि वह लौटेगा, और समन/वारंट की व्यवस्था उन मामलों के लिए बची रहती है जहाँ व्यक्ति न्यायालय के सामने मौजूद नहीं है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा किसी भी व्यक्ति को, जो स्वेच्छा से भीतर आता है, गिरफ़्तार करने की अनुमति देती है—ऐसा कहना ग़लत है।

    तथ्य: हक़ीक़त इसके उलट है—यह प्रावधान पहले से उपस्थित व्यक्ति से केवल बंधपत्र लेकर समन या गिरफ़्तारी से बचने की सुविधा देता है।