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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 8

Court of Session

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जिले स्तर पर सेशंस न्यायालय गंभीर आपराधिक मामलों (जैसे दीर्घकालीन सज़ा या मृत्युदंड वाले अपराध) का प्रमुख विचारण न्यायालय होता है। यह प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता के पुराने ढांचे की निरंतरता बनाए रखता है, ताकि हर क्षेत्र में कार्यरत सेशंस न्यायालय हो, नियुक्ति प्रक्रिया उच्च न्यायालय के नियंत्रण में रहे (कार्यपालिका से न्यायपालिका की स्वतंत्रता हेतु), और ऐसी व्यावहारिक वैकल्पिक व्यवस्थाएँ रहें कि कर्मचारियों की कमी, रिक्तियाँ या न्यायाधीश की अस्थायी अनुपस्थिति के कारण न्याय प्रक्रिया ठप्प न पड़े।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने ऐतिहासिक रूप से दंप्रसं (CrPC) के समकक्ष प्रावधान (Section 9) को न्यायिक कार्य की सततता सुनिश्चित करने वाला माना है—उदाहरणतः यह स्वीकार किया है कि रिक्ति के दौरान तात्कालिक मामलों को सँभालने वाले अतिरिक्त सेशंस न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी का अधिकार-क्षेत्र पूर्ण और वैध है, केवल अस्थायी या बाद में चुनौती योग्य नहीं। बैठकों के स्थान परिवर्तन (उप-धारा 6) के लिए दोनों पक्षों की सम्मति की शर्त को न्यायसंगतता और अभियुक्त के निष्पक्ष, निर्बाध विचारण के अधिकार की रक्षा हेतु कड़ाई से पढ़ा गया है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि राज्य सरकार सेशंस न्यायाधीश नियुक्त करती है क्योंकि वह न्यायालय ‘स्थापित’ करती है।

    तथ्य: राज्य सरकार केवल संस्था के रूप में सेशंस न्यायालय की स्थापना करती है; वास्तविक न्यायाधीशों (सेशंस न्यायाधीश तथा अतिरिक्त सेशंस न्यायाधीश) की नियुक्ति उच्च न्यायालय करता है, जिससे न्यायपालिका कार्यपालिका से स्वतंत्र बनी रहती है।

  • मिथक: यह कहना सही नहीं है कि सेशंस न्यायालय अपनी सुविधा से जब चाहे जहाँ चाहे सुनवाई स्थान बदल सकता है।

    तथ्य: वह केवल उसी डिवीजन के भीतर, तभी अन्य स्थान पर बैठ सकता है जब अभियोजन और अभियुक्त—दोनों—सहमति दें, और न्यायालय को यह वास्तव में अधिक सुविधाजनक लगे—यह एकतरफा निर्णय नहीं है।

  • मिथक: यदि सेशंस न्यायाधीश का पद रिक्त हो तो नए न्यायाधीश की नियुक्ति तक कोई तात्कालिक कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती—यह कथन गलत है।

    तथ्य: कानून विशेष रूप से अनुमति देता है कि ऐसी रिक्ति के दौरान अतिरिक्त सेशंस न्यायाधीश—और उसके अभाव में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी—तात्कालिक आवेदनों की सुनवाई करें, ताकि कार्य पूर्णतः ठप्प न पड़े।