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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 7

Territorial divisions

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारत में आपराधिक न्याय प्रशासन के लिए स्पष्ट भौगोलिक मानचित्र आवश्यक है, ताकि न्यायालय, पुलिस अधिकार-क्षेत्र और न्यायिक अधिकारी ठीक-ठीक जानें कि वे किस क्षेत्र के लिए उत्तरदायी हैं। यह प्रावधान (पुराने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 7 से आगे बढ़ाया गया) सुनिश्चित करता है कि राज्य का हर हिस्सा किसी न किसी सेशंस डिविजन और ज़िले के अंतर्गत आए, जिससे सेशंस न्यायालयों और मजिस्ट्रेटों के कार्य-क्षेत्र की संरचना तय रहती है। किसी परिवर्तन से पहले उच्च न्यायालय से परामर्श की अनिवार्यता न्यायालय-प्रशासन को प्रभावित करने वाले निर्णयों में न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है, क्योंकि उच्च न्यायालय को प्रत्येक क्षेत्र में मुक़दमों के बोझ और न्यायिक अवसंरचना का व्यावहारिक ज्ञान होता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि राज्य सरकार जब चाहे अपने दम पर न्यायिक ज़िलों की सीमाएँ फिर से खींच सकती है।

    तथ्य: क़ानून यह अनिवार्य करता है कि सेशंस डिविजन, ज़िले या उप-विभाग बनाने या उनमें परिवर्तन करने से पहले राज्य सरकार उच्च न्यायालय से परामर्श करे।

  • मिथक: यह कहना गलत है कि BNSS के आने पर CrPC के सारे ज़िले और डिविजन कानूनी रूप से फिर से शून्य से बनाने पड़े।

    तथ्य: उप-धारा (4) के अनुसार, जो सेशंस डिविजन, ज़िले और उप-विभाग पहले से अस्तित्व में थे, वे स्वतः ही ऐसे माने जाते हैं मानो उन्हें इसी नई धारा के तहत बनाया गया हो।