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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 468

Period of detention undergone by accused to be set off against sentence of imprisonment

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह गहरी अन्यायपूर्ण बात होगी कि कोई व्यक्ति धीमी न्यायिक प्रक्रिया के कारण, जो अक्सर उसकी गलती नहीं होती, मुकदमे की प्रतीक्षा में जेल में बिताए समय के ऊपर से पूरी सजा अलग से भुगते। यह पुरानी ‘समायोजन’ (set-off) की व्यवस्था दंड को उस कुल वास्तविक हिरासत अवधि के अनुपात में रखती है जो व्यक्ति ने भुगती है, न कि सिर्फ दोषसिद्धि के बाद की अवधि के आधार पर।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

भारतीय न्यायालयों ने लगातार इस समायोजन नियम (पूर्व में दंप्रसं की धारा 428) को अनिवार्य माना है, न कि विवेकाधीन—उसी मामले में हुई दोषसिद्धि-पूर्व हिरासत की अवधि को गिनना ही होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि परीक्षण न्यायालय सजा सुनाते समय ही यह समायोजन गणना करके लागू करें, न कि बाद में कैदी को जेल प्रशासन से यह निपटाने के लिए छोड़ दें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल दोषसिद्धि के बाद जेल में बिताया गया समय ही सजा में गिना जाता है।

    तथ्य: दोषसिद्धि से पहले जांच और विचारण के दौरान हिरासत में बिताया गया समय भी गिना जाता है और अंतिम सजा से घटा दिया जाता है।