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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 45

Pursuit of offenders into other jurisdictions

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारत में पुलिस व्यवस्था राज्य, ज़िला और स्थानीय क्षेत्राधिकारों में संगठित है, जिससे ऐतिहासिक रूप से यह समस्या बनती थी कि जैसे ही संदिग्ध सीमा रेखा पार करता, पीछा कर रहा अधिकारी तकनीकी रूप से वहाँ गिरफ़्तारी का अधिकार खो देता। यह प्रावधान (पुराने Code of Criminal Procedure, 1973 की धारा 60 से आगे बढ़ाया गया) उस शून्य को भरता है और क्षेत्राधिकार सीमाओं के पार ‘तात्कालिक पीछा’ (hot pursuit) की अनुमति देता है, ताकि केवल ज़िला या राज्य की सीमा लाँघने भर से अपराधी गिरफ़्तारी से न बच सकें।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने सामान्यतः इस प्रावधान का संकीर्ण और कार्यात्मक अर्थ लगाया है: यह केवल पीछा करने और गिरफ़्तार करने की प्रचलित शक्ति के विस्तार की इजाज़त देता है, अपने आप में कोई नई गिरफ़्तारी-शक्ति नहीं बनाता। अधिकारी के पास पीछा शुरू होने से पहले ही बिना वारंट गिरफ़्तारी का वैधानिक अधिकार होना चाहिए। अदालतों ने यह भी रेखांकित किया है कि यह शक्ति अन्य सुरक्षा उपायों को निरस्त नहीं करती—जैसे गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताने की अनिवार्यता, या मनमानी निरुद्धि के विरुद्ध सुरक्षा।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह प्रावधान पुलिस को बिना किसी कानूनी आधार के, किसी को भी, कहीं भी गिरफ़्तार करने की शक्ति देता है।

    तथ्य: यह केवल उसी स्थिति में पीछा और गिरफ़्तारी की अनुमति देता है जब अधिकारी के पास पीछा शुरू होने से पहले ही बिना वारंट गिरफ़्तारी का वैध अधिकार हो; यह कोई नई गिरफ़्तारी-शक्ति निर्मित नहीं करता।

  • मिथक: इस प्रावधान के तहत पुलिस संदिग्धों का पीछा करते हुए अन्य देशों में जा सकती है।

    तथ्य: यह प्रावधान केवल भारत के भीतर पीछा करने की अनुमति देता है; अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ पार करने का अधिकरण यह नहीं देता।