Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 386
When Registrar or Sub-Registrar to be deemed a Civil Court
When the State Government so directs, any Registrar or any Sub-Registrar appointed under the Registration Act, 1908 (16 of 1908), shall be deemed to be a Civil Court within the meaning of sections 384 and 385.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
रजिस्ट्रार और उप‑रजिस्ट्रार दस्तावेज़ों का पंजीकरण देखते हैं और कभी‑कभी उन्हें वही प्रकार का विघ्नकारी या अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ता है जो न्यायालयों में होता है, पर वे सामान्यतः ‘न्यायालय’ नहीं होते। यह धारा राज्य सरकार को यह शक्ति देती है कि वह उसी‑दिन अवमानना‑निपटान की शक्तियाँ (धारा 384 और 385) उन्हें भी बढ़ाए, ताकि वे भी अपने आधिकारिक कार्य के दौरान व्यवस्था और आदर बनाए रख सकें।