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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 383

Summary procedure for trial for giving false evidence

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सामान्यतः, अदालत में झूठ बोलने पर अभियोजन चलाने के लिए अलग और धीमी शिकायत-प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। परन्तु जब कोई वरिष्ठ न्यायाधीश निर्णय देते समय अपनी आँखों के सामने हुआ झूठा साक्ष्य देख लेता है, तो यह धारा तत्क्षण, संक्षिप्त कार्यवाही की अनुमति देती है — जिससे शपथभंग (perjury) के विरुद्ध तेज और प्रत्यक्ष निवारक प्रभाव पड़ता है, फिर भी निष्पक्षता (सुने जाने का अवसर) आवश्यक रहती है, और यदि मूल निर्णय ही चुनौती में हो तो कार्यवाही रोकी जाती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: जो न्यायाधीश संदेह करता है कि साक्षी ने झूठ बोला, उसे कार्रवाई से पहले हमेशा अलग लम्बी शिकायत दायर करनी ही पड़ती है।

    तथ्य: यह धारा न्यायाधीश को, निर्णय सुनाते ही, एक विकल्प के रूप में संक्षिप्त प्रक्रिया द्वारा साक्षी का तुरंत परीक्षण करने की अनुमति देती है।