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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 379

Procedure in cases mentioned in section 215

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

अदालतें निष्पक्ष निर्णय तक पहुँचने के लिए पूर्णतः सत्य साक्ष्य और प्रामाणिक दस्तावेज़ों पर निर्भर रहती हैं। जब कोई व्यक्ति शपथ पर झूठ बोलता है या किसी अदालती कार्यवाही के भीतर दस्तावेज़ गढ़ता है, तो हानि केवल दूसरी पक्ष को नहीं, बल्कि स्वयं न्याय-तंत्र को होती है। यह धारा अदालतों को ऐसे अपराधों के अभियोजन को प्रारम्भ कराने का सीधा और संरचित तरीका देती है—न कि इसे किसी निजी पक्ष की शिकायत पर छोड़ देती है—क्योंकि अपनी ही कार्यवाही के दुरुपयोग का पता लगाने की सर्वश्रेष्ठ स्थिति अक्सर अदालत के पास ही होती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: कोई भी व्यक्ति मनमाने ढंग से अदालत में गवाही देने वाले को झूठा ठहरा कर तुरंत उसका अभियोजन करवा सकता है—ऐसा नहीं है।

    तथ्य: अदालत-कार्यवाही से जुड़े ऐसे अपराधों का अभियोजन सामान्यतः किसी राहगीर की निजी शिकायत से नहीं, बल्कि इसी धारा के अंतर्गत अदालत द्वारा की गई औपचारिक शिकायत से ही प्रारम्भ होता है।