Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 31
Public when to assist Magistrates and police
Every person is bound to assist a Magistrate or police officer reasonably demanding his aid—
(a) in the taking or preventing the escape of any other person whom such Magistrate or police officer is authorised to arrest; or
(b) in the prevention or suppression of a breach of the peace; or
(c) in the prevention of any injury attempted to be committed to any public property.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
औपनिवेशिक काल की दंड प्रक्रिया विधि (मूलतः Code of Criminal Procedure, 1861 की धारा 37, जिसे 1898 और 1973 के संहिता में आगे बढ़ाया गया) ने यह माना कि पुलिस और मजिस्ट्रेट भीड़ को हमेशा नियंत्रित नहीं कर सकते, भागते संदिग्धों को पकड़ नहीं सकते, या दंगों को अकेले नहीं रोक सकते। यह प्रावधान सामान्य नागरिकों पर एक नागरिक कर्तव्य आरोपित करता है कि वे आधिकारिक और उचित अनुरोध पर यथोचित सहायता दें—इस विचार को प्रतिबिंबित करते हुए कि लोक-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना साझा जिम्मेदारी है, केवल राज्य का काम नहीं। Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 ने इस कर्तव्य को पूर्ववर्ती Code of Criminal Procedure से मूलतः अपरिवर्तित रखा है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने ऐतिहासिक रूप से इसे सीमित और संकीर्ण दायरे वाला कर्तव्य माना है—यह केवल तब लागू होता है जब कोई मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी ‘उचित’ सहायता मांगे, और केवल उन तीन विशिष्ट उद्देश्यों के लिए (गिरफ्तारी/भागने से रोकना, शांति भंग रोकना, तथा सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा)। न्यायिक टिप्पणी ने रेखांकित किया है कि वैध कारण के बिना सहायता से इनकार करने पर अलग दंडात्मक परिणाम हो सकते हैं (जिनका समावेशन Bharatiya Nyaya Sanhita के अपराध प्रावधानों में है), परंतु अधिकारी का आग्रह स्वयं उचित और उसके अधिकार-क्षेत्र के भीतर होना चाहिए—नागरिक मनमाने या अवैध सहायता-आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: आपको पुलिस की किसी भी बात में, चाहे वह असंबंधित काम ही क्यों न हो, मदद करने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
तथ्य: यह कर्तव्य केवल तीन खास स्थितियों में लागू होता है: उस व्यक्ति की गिरफ्तारी में या उसके भागने को रोकने में मदद करना जिसे अधिकारी गिरफ्तार करने का अधिकार रखता है; शांति भंग को रोकना; या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाना—और वह भी तभी जब मांग उचित हो।
मिथक: यह कानून पुलिस को नागरिकों से हिंसक या ख़तरनाक बल के प्रयोग के लिए मजबूर कराने की छूट देता है।
तथ्य: यह प्रावधान केवल ‘उचित’ सहायता की अपेक्षा करता है; यह अधिकारियों को ऐसे कृत्य मांगने का अधिकार नहीं देता जो अनुचित, अवैध, या सामान्य व्यक्ति से युक्तिसंगत रूप से अपेक्षित सीमा से अधिक ख़तरनाक हों।