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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 30

Powers of superior officers of police

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान दण्ड प्रक्रिया संहिता की पूर्ववर्ती व्यवस्था (Section 36) को आगे बढ़ाता है, जिसका उद्देश्य पुलिस पर्यवेक्षण और कमान को सुचारु रखना है। क्योंकि वरिष्ठ अधिकारी (जैसे एसपी, डीआईजी, या आईजी) अनेक थानों की देखरेख करते हैं, कानून सुनिश्चित करता है कि कार्रवाई के समय वे थाना प्रभारी से कानूनी रूप से कमज़ोर न हों। यह कमान-श्रृंखला को सुदृढ़ करता है, जिससे वरिष्ठ अधिकारी अपने व्यापक क्षेत्राधिकार में आगे आकर वही जाँच और प्रवर्तन शक्तियाँ प्रयोग कर सकें.

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने सामान्यतः इस प्रावधान (और उसके CrPC के पूर्ववर्ती) की यह व्याख्या की है कि वरिष्ठ अधिकारी की शक्तियाँ किसी एक थाने की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके प्रभार वाले पूरे क्षेत्र में फैलती हैं—बशर्ते प्रयोग की गई शक्तियाँ वही प्रकार की हों जो किसी प्रभारी अधिकारी द्वारा प्रयोग की जा सकती हैं। न्यायिक निर्णयों ने स्पष्ट किया है कि गिरफ़्तारी, जाँच या तलाशी जैसी कार्रवाइयाँ, यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा उसके नियुक्त क्षेत्राधिकार में और उसके उच्च पद के आधार पर की गई हों, तो वैध मानी जाएँगी, भले ही वह अधिकारी उस विशेष थाने से संबद्ध न हो.

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की शक्तियाँ केवल उस खास पुलिस थाने तक सीमित होती हैं जहाँ वह जाता है—यह कथन गलत है.

    तथ्य: कानून कहता है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी की शक्तियाँ उस पूरे क्षेत्र में लागू होती हैं जिसकी निगरानी के लिए उसे नियुक्त किया गया है, न कि केवल एक थाने तक.

  • मिथक: केवल किसी थाने का औपचारिक प्रभारी ही थाने-स्तरीय शक्तियों का प्रयोग कर सकता है—यह कथन सही नहीं है.

    तथ्य: जिस किसी अधिकारी का पद उस थाने के प्रभारी से ऊपर है, वह अपने व्यापक क्षेत्राधिकार के भीतर वही शक्तियाँ प्रयोग कर सकता/सकती है.