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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 28

Withdrawal of powers

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

बीएनएसएस की कई धाराएँ उच्च न्यायालयों, राज्य सरकारों या वरिष्ठ मजिस्ट्रेटों को यह शक्ति देती हैं कि वे अपने अधीन अधिकारियों/कर्मचारियों को विशेष न्यायिक या प्रशासनिक अधिकार सौंपें (उदाहरण के लिए, कार्यपालक अधिकारियों को मजिस्टीरियल अधिकार देना)। क्योंकि ये अधिकार स्थायी क़ानून से नहीं बल्कि प्रशासनिक या न्यायिक आदेशों से दिए जाते हैं, इसलिए परिस्थितियाँ बदलने, दुरुपयोग होने, या अधिकारी के स्थानांतरण होने पर वही प्राधिकारी उन्हें संशोधित या वापस लेने की समकक्ष शक्ति रखती है। यह 1973 के आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 21 के पुराने प्रावधान का प्रतिबिंब है, और इसी प्रकार की दीर्घकालिक संरचनात्मक सुरक्षा को आगे बढ़ाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: एक बार किसी व्यक्ति को इस क़ानून के तहत विशेष अधिकार दे दिए जाएँ, तो वे उसे सदा के लिए बने रहते हैं।

    तथ्य: अधिकार देने वाली प्राधिकारी (उच्च न्यायालय, राज्य सरकार, या संबंधित मजिस्ट्रेट) वे अधिकार कभी भी, पूर्णतः या आंशिक रूप से, वापस ले सकती है।

  • मिथक: सिर्फ़ न्यायालय ही अधिकार वापस ले सकते हैं।

    तथ्य: सिर्फ़ उच्च न्यायालय ही नहीं, राज्य सरकार भी अपने द्वारा दिए गए अधिकार वापस ले सकती है।