Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 214
Additional Sessions Judges to try cases made over to them
An Additional Sessions Judge shall try such cases as the Sessions Judge of the division may, by general or special order, make over to him for trial or as the High Court may, by special order, direct him to try.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
सत्र न्यायालयों में प्रायः इतने अधिक मामले आते हैं कि एक ही न्यायाधीश सब नहीं निपटा सकता, इसलिए कार्यभार बाँटने के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नियुक्त किए जाते हैं। यह प्रावधान, जो दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 194 से आगे बढ़ाया गया है, अधिकार-श्रृंखला को स्पष्ट रखता है: कौन सा मामला किस अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के पास जाएगा, यह सत्र न्यायाधीश (या विशेष परिस्थितियों में उच्च न्यायालय) तय करता है। इससे भ्रम, मंच-चयन (forum-shopping) और बिना वैध अधिकृत किए किसी न्यायाधीश द्वारा सुनवाई होने से बचाव होता है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने लगातार माना है कि किसी मामले की सुनवाई करने का अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का अधिकार पूर्णतः वैध आवंटन आदेश से ही उत्पन्न होता है—या तो सत्र न्यायाधीश का सामान्य आदेश (जैसे एक स्थायी रोस्टर) या विशेष आदेश (किसी एक निर्धारित मामले का आवंटन), अथवा उच्च न्यायालय का प्रत्यक्ष आदेश। यदि ऐसा कोई आदेश न हो, तो उस विचारण को अधिकार-क्षेत्र के अभाव में चुनौती दी जा सकती है। न्यायालयों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सामान्य आदेश (जैसे प्रकार या संख्या के आधार पर मामलों का प्रशासनिक रोस्टर) पर्याप्त है; प्रत्येक मामले के लिए नया विशेष आदेश आवश्यक नहीं है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अपनी इच्छा से कोई भी आपराधिक मामला नहीं उठा सकता।
तथ्य: वह केवल वही मामले सुन सकता है जो सत्र न्यायाधीश द्वारा (सामान्य या विशेष आदेश के माध्यम से) विधिवत उसे सौंपे गए हों, या जिनकी सुनवाई का निर्देश उच्च न्यायालय ने दिया हो।
मिथक: हर एक मामले के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को अलग-अलग, विशिष्ट आदेश लेना आवश्यक है—यह कथन गलत है।
तथ्य: एक सामान्य आदेश—जैसे प्रकार या संख्या के आधार पर मामलों का स्थायी रोस्टर—पर्याप्त होता है; हर मामले के लिए नया विशेष आदेश आवश्यक नहीं है।