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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 162

Magistrate may prohibit repetition or Continuance of public nuisance

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सड़क रोकना, जलस्रोत को प्रदूषित करना, या ऐसा शोरयुक्त/खतरनाक कार्य चलाना जो आम जनता को प्रभावित करता हो—जैसे सार्वजनिक उपद्रव—के मामलों में केवल धीमी आपराधिक कार्यवाही नहीं, बल्कि त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई चाहिए। यह प्रावधान (पुराने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 143 से आगे बढ़ाया गया) नामित मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सीधे, निवारक शक्ति देता है ताकि भारतीय न्याय संहिता के तहत पूर्ण अभियोजन की प्रतीक्षा किए बिना ऐसे उपद्रवों को और नुकसान होने से पहले ही रोका जा सके।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

एक समान पूर्ववर्ती प्रावधान (CrPC की धारा 143) के तहत न्यायालयों ने माना है कि यह शक्ति निवारक और प्रशासनिक प्रकृति की है—इसका उद्देश्य बीते आचरण को दंडित करना नहीं, बल्कि चल रहे या दोहराए जा रहे उपद्रव को रोकना है। न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि मजिस्ट्रेट को उपद्रव का मूल्यांकन दंडात्मक मौलिक क़ानून में दी गई परिभाषा के अनुसार करना चाहिए, और ऐसे आदेश उन अधिक विस्तृत शर्तयुक्त आदेशों से भिन्न हैं जो आकस्मिक उपद्रव या आशंकित खतरे से संबंधित प्रावधानों में होते हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह शक्ति केवल मजिस्ट्रेट ही प्रयोग कर सकता/सकती है।

    तथ्य: उप पुलिस आयुक्त भी यह शक्ति इस्तेमाल कर सकता/सकती है, पर तभी जब राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट ने उसे विशेष रूप से यह अधिकार प्रदान किया हो।

  • मिथक: यह धारा स्वयं यह निर्धारित करती है कि सार्वजनिक उपद्रव क्या होता है।

    तथ्य: यह उपद्रव की परिभाषा स्वयं नहीं देती; यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) या अन्य विशेष/स्थानीय क़ानूनों में दी गई परिभाषा पर निर्भर करती है।