Skip to content
सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 154

Person to whom order is addressed to obey or show cause

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान भारतीय दंड प्रक्रिया की एक दीर्घकालीन विशेषता को जारी रखता है (जो पहले दंड प्रक्रिया संहिता में मिलती थी), जिसके अंतर्गत मजिस्ट्रेट पूर्ण सुनवाई से पहले भी शर्तीय आदेश जारी कर सकते हैं—उदाहरण के लिए, सार्वजनिक उपद्रव या अवरोध हटवाने के लिए। निष्पक्षता की मांग है कि प्रभावित व्यक्ति को आदेश अंतिम होने से पहले या तो उसका पालन करने या उसे चुनौती देने का वास्तविक अवसर मिले। ध्वनि‑दृश्य सम्मेलन की अनुमति जोड़ना 2023 में दंड प्रक्रिया के आधुनिकीकरण को दर्शाता है, जिससे लोगों के लिए आदेशों को दूरस्थ रूप से चुनौती देना आसान हो गया है और हर बार शारीरिक रूप से उपस्थित होना आवश्यक नहीं रहता।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: ऐसे आदेश को चुनौती देने के लिए आपको हमेशा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है।

    तथ्य: अब क़ानून स्पष्ट रूप से ध्वनि‑दृश्य सम्मेलन (audio-video conferencing) के माध्यम से उपस्थिति या सुनवाई की अनुमति देता है, इसलिए हर बार शारीरिक उपस्थिति आवश्यक नहीं है।

  • मिथक: आदेश को नज़रअंदाज़ कर देना और कुछ न करना एक वैध तीसरा विकल्प है।

    तथ्य: यह प्रावधान केवल दो ही रास्ते देता है—आदेश का पालन करना या उपस्थित होकर कारण बताना—जिससे यह संकेत मिलता है कि आदेश को अनदेखा करना वैध प्रतिक्रिया नहीं है।