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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 15

Special Executive Magistrates

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय आपराधिक प्रक्रिया में लम्बे समय से यह व्यवस्था रही है कि सरकारें त्वरित स्थानीय कानून-व्यवस्था की ज़रूरतों—जैसे भीड़ नियंत्रण, कर्फ़्यू या जन- सुरक्षा के प्रसंग—के लिए विशेष दंडाधिकारी नियुक्त कर सकें, ताकि नियमित न्यायिक दंडाधिकारी की प्रतीक्षा किए बिना काम चल सके। इसी प्रकार के पुराने दंड प्रक्रिया संहिता प्रावधानों से आगे बढ़ती यह व्यवस्था कार्यपालिका को विश्वस्त अधिकारियों, जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं, को सीमित व समयबद्ध दंडाधिकारी कार्य सौंपने की अनुमति देती है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पूर्ववर्ती और समान शब्दों वाले दंड प्रक्रिया संहिता प्रावधान के तहत न्यायालयों ने सामान्यतः माना कि ऐसे विशेष दंडाधिकारियों को केवल वही विशिष्ट शक्तियाँ दी जानी चाहिए जो सरकार द्वारा स्पष्ट रूप से प्रदत्त हों; उन्हें समग्र दंडाधिकारी अधिकार नहीं दिए जा सकते। साथ ही, ऐसी नियुक्तियाँ स्पष्ट, सीमित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हों और नियमित न्यायिक दंडाधिकारियों का स्थानापन्न न बनें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है कि विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी के पास साधारण दंडाधिकारी की सारी शक्तियाँ होती हैं।

    तथ्य: उन्हें केवल वही विशिष्ट शक्तियाँ मिलती हैं जो राज्य सरकार देने का निर्णय करे; समग्र दंडाधिकारी अधिकार नहीं।

  • मिथक: यह कथन गलत है कि केवल असैनिक व्यक्ति या न्यायिक अधिकारी ही विशेष कार्यपालक दंडाधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं।

    तथ्य: क़ानून स्पष्ट रूप से यह भी अनुमति देता है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (पुलिस अधीक्षक स्तर या उससे ऊपर) को भी ऐसे पद पर नियुक्त किया जा सकता है।