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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 133

Copy of order to accompany summons or warrant

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान भारतीय आपराधिक प्रक्रिया की ‘शांति एवं सदाचार सुनिश्चित करने हेतु सुरक्षा’ योजना से आता है, जो पुराने दंड प्रक्रिया संहिता (Section 113) से लेकर भारत नगरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तक जारी है। इन निवारक कार्यवाहियों में, भविष्य में दुराचरण की आशंका के आधार पर दंडाधिकारी किसी व्यक्ति को निर्देश दे सकता है कि वह बताये कि सदाचार हेतु बंधपत्र क्यों न निष्पादित कराया जाए। क्योंकि ऐसा कदम किसी अपराध के घटित होने से पहले ही व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित कर सकता है, इसलिए प्रक्रिया-सम्मत न्याय की मांग है कि उस व्यक्ति को पूरी तरह पता हो कि उसे क्यों तलब या गिरफ़्तार किया जा रहा है। समन या वारंट के साथ मूल आदेश देना अनिवार्य करने से सुनिश्चित होता है कि व्यक्ति आरोपों को लेकर अटकल में न रहे और उपयुक्त प्रत्युत्तर या बचाव की तैयारी कर सके।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि पुलिस बिना कारण बताए समन या वारंट की तामील कर सकती है।

    तथ्य: कानून यह अनिवार्य करता है कि अधिकारी समन या वारंट के साथ मूल आदेश की प्रति भी थमाए, ताकि व्यक्ति को की गई कार्रवाई के आधार/कारण का पता रहे।