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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 132

Summons or warrant in case of person not so present

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान उन न्यायिक प्रक्रियात्मक उपकरणों का हिस्सा है जिनसे अदालतें यह सुनिश्चित करती हैं कि कुछ प्रकार की कार्यवाहियों (आम तौर पर शांति-सुरक्षा या सुशील व्यवहार से संबंधित मामले) में शामिल व्यक्ति वास्तव में मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित हो। यह व्यक्ति की स्थिति के आधार पर दो मार्ग देता है—यदि व्यक्ति स्वतंत्र है तो समन, और यदि पहले से हिरासत में है तो प्रस्तुतिकरण का वारंट—जबकि उपबंध (proviso) व्यक्तिगत स्वतंत्रता और तात्कालिक लोक-सुरक्षा के बीच संतुलन साधता है, ताकि आसन्न शांति-भंग के वास्तविक, अभिलिखित भय की दशा में शीघ्र गिरफ़्तारी संभव हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: मजिस्ट्रेट किसी को केवल शंका के आधार पर, बिना किसी कारण के, तत्काल गिरफ़्तार कर सकता है—यह कथन ग़लत है।

    तथ्य: क़ानून यह अपेक्षा करता है कि मजिस्ट्रेट पहले पुलिस रिपोर्ट या विश्वसनीय सूचना प्राप्त करे, उसका सार लिखित रूप में दर्ज करे, और इस बात से संतुष्ट हो कि वास्तविक और आसन्न शांति-भंग को रोकने का एकमात्र उपाय तात्कालिक गिरफ़्तारी है—अर्थात यह निरंकुश शक्ति नहीं है।

  • मिथक: समन और वारंट मजिस्ट्रेट के मनोभाव के अनुसार एक-दूसरे के स्थान पर जैसे-तैसे इस्तेमाल किए जाते हैं—यह ग़लत है।

    तथ्य: निर्णय व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है: जो व्यक्ति स्वतंत्र है उसके लिए समन, और जो पहले से कहीं हिरासत में है उसके लिए संरक्षक को दिया जाने वाला प्रस्तुतिकरण-वारंट प्रयुक्त होता है।