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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 13

Subordination of Judicial Magistrates

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जिला स्तर के आपराधिक न्यायालयों में स्पष्ट पदानुक्रम आवश्यक है ताकि प्रशासनिक नियंत्रण, प्रकरण आवंटन और पर्यवेक्षण बिना इस भ्रम के सुचारु रूप से चलें कि किसे किसको रिपोर्ट करना है। यह प्रावधान (पुराने दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 15 से आगे बढ़ाया गया) सुनिश्चित करता है कि जिले के वरिष्ठतम न्यायिक अधिकारी के रूप में सत्र न्यायाधीश के पास अंतिम पर्यवेक्षण रहे, जबकि दैनिक प्रशासनिक कार्य-वितरण दक्षता हेतु मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रत्यायोजित रहे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का अधिकार सत्र न्यायाधीश से पृथक और पूर्णतः स्वतंत्र नहीं है।

    तथ्य: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयं सत्र न्यायाधीश के अधीन होते हैं, इसलिए अंतिम पर्यवेक्षी नियंत्रण सत्र न्यायाधीश के पास रहता है।

  • मिथक: यह कथन गलत है: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा कार्य-वितरण के लिए बनाए गए नियम संहिता (Sanhita) को निरस्त नहीं कर सकते।

    तथ्य: ऐसे किसी भी नियम या विशेष आदेश को संहिता (Sanhita) के अनुरूप होना चाहिए; वे उससे टकरा नहीं सकते।