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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 12

Local Jurisdiction of Judicial Magistrates

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

फौजदारी न्यायालयों के लिए क्षेत्रीय सीमाएँ साफ़-साफ़ तय होना ज़रूरी है ताकि मामले सही मजिस्ट्रेट के पास जाएँ और अधिकार-क्षेत्र को लेकर भ्रम न रहे। यह प्रावधान एक पुराने ढाँचे को जारी रखता है (जिसकी उत्पत्ति दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 से है), जिसके तहत उच्च न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से, मजिस्ट्रेटों के क्षेत्राधिकार का लचीला संगठन कर सकता है — ताकि प्रशासनिक सुविधा, कार्य-वितरण, या विशेष न्यायालयों (जैसे विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट) के बहु-स्थलीय संचालन की ज़रूरत के अनुसार समायोजन किए जा सकें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: एक मजिस्ट्रेट केवल एक ही तय इमारत या कस्बे में अदालत लगा सकता है।

    तथ्य: उपधारा (1) के प्रावधान (प्रोवाइज़ो) से साफ़ है कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अपनी नियुक्त स्थानीय सीमा के भीतर कहीं भी बैठक कर सकता/सकती है; केवल एक स्थान तक सीमित रहने की बाध्यता नहीं है।

  • मिथक: हर मजिस्ट्रेट को स्वयमेव, किसी सीमा-निर्धारण आदेश की परवाह किए बिना, पूरे ज़िले पर अधिकार होता है।

    तथ्य: उपधारा (2) कहती है कि ज़िला-व्यापी क्षेत्राधिकार केवल डिफ़ॉल्ट रूप में लागू होता है — यदि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संकुचित स्थानीय सीमाएँ निर्धारित कर दी हैं, तो वही सीमाएँ प्रभावी होंगी।