Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 105
Recording of search and seizure through audio-video electronic means
The process of conducting search of a place or taking possession of any property, article or thing under this Chapter or under section 185, including preparation of the list of all things seized in the course of such search and seizure and signing of such list by witnesses, shall be recorded through any audio-video electronic means preferably mobile phone and the police officer shall without delay forward such recording to the District Magistrate, Sub-divisional Magistrate or Judicial Magistrate of the first class.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (जिसने दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 का स्थान लिया) में आपराधिक प्रक्रिया का आधुनिकीकरण करने और तलाशी व ज़ब्ती के दौरान पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जोड़ा गया। इतिहास में अक्सर यह विवाद उठता रहा कि तलाशी निष्पक्ष थी या नहीं, गवाहों ने वास्तव में ज़ब्त वस्तुएँ देखीं या नहीं, या कहीं सामान रखकर फँसाने की कोशिश तो नहीं हुई। व्यापक रूप से उपलब्ध मोबाइल फ़ोन का अनिवार्य ऑडियो‑वीडियो रिकॉर्ड, अदालतों द्वारा बाद में जाँचा जा सकने वाला निष्पक्ष साक्ष्य बनाता है, जिससे मनगढ़ंत कार्रवाई या प्रक्रिया के दुरुपयोग के आरोप घटते हैं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि पुलिस के पास उपयुक्त रिकॉर्डिंग उपकरण न हो तो वीडियो रिकॉर्डिंग वैकल्पिक है—यह कथन गलत है।
तथ्य: कानून साफ़ तौर पर सामान्य मोबाइल फ़ोन के उपयोग की अनुमति देता है, इसलिए विशेष उपकरण न होने का बहाना बनाकर रिकॉर्डिंग छोड़ना स्वीकार्य नहीं है।
मिथक: केवल ज़ब्ती की क्रिया को रिकॉर्ड करना पर्याप्त है; ज़ब्ती सूची या गवाहों के हस्ताक्षर रिकॉर्ड करने की ज़रूरत नहीं—यह बात गलत है।
तथ्य: प्रावधान के अनुसार पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग अनिवार्य है, जिसमें ज़ब्त‑वस्तुओं की सूची तैयार करना और उस पर गवाहों के हस्ताक्षर कराना भी शामिल है।
मिथक: पुलिस रिकॉर्डिंग को मजिस्ट्रेट को जब सुविधाजनक हो तब, चाहे हफ्तों बाद, भेज सकती है—यह व्याख्या गलत है।
तथ्य: कानून कहता है कि रिकॉर्डिंग ‘बिना विलंब’ अग्रेषित की जाए, अर्थात शीघ्रता से, किसी लंबे अंतराल के बाद नहीं।