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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 106

Power of police officer to seize certain property

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान पुराने दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 102 से आया है, और इस दीर्घकालिक आवश्यकता को दर्शाता है कि पुलिस जब चोरी का माल या संदिग्ध संपत्ति पाए तो बिना न्यायालय की अनुमति की प्रतीक्षा किए शीघ्र कार्यवाही कर सके—साथ ही प्रक्रिया के दुरुपयोग से बचाने के लिए न्यायालय की जानकारी व निगरानी बनी रहे। बीएनएसएस ने इसकी भाषा बदली और उपबंध (proviso) के माध्यम से सस्ती, शीघ्र नष्ट होने वाली ज़ब्त वस्तुओं के त्वरित निस्तारण का स्पष्ट तंत्र जोड़ा, ताकि फिजूलखर्ची और थानों पर भंडारण का बोझ न बढ़े।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समतुल्य दंप्रसं प्रावधान के तहत न्यायालयों ने महत्वपूर्ण सीमाएँ स्पष्ट कीं। State of Maharashtra v. Tapas D. Neogy (1999) में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इस शक्ति के अंतर्गत ‘संपत्ति’ में बैंक खाते भी आते हैं, जिससे जाँच के दौरान संदिग्ध धन को फ़्रीज़ करना संभव हुआ। बाद में, Nevada Properties Pvt. Ltd. v. State of Maharashtra (2019) में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि इस धारा के तहत पुलिस अचल संपत्ति (जैसे भूमि या भवन) को ‘ज़ब्त’ नहीं कर सकती—अधिकतम उसके हस्तांतरण पर रोक लगा सकती है—क्योंकि अचल संपत्ति का भौतिक रूप से कब्ज़ा लेना वैसा व्यावहारिक अर्थ नहीं रखता जैसा चल संपत्ति के लिए होता है। अपेक्षा है कि ये व्याख्याएँ बीएनएसएस प्रावधान के अनुप्रयोग का भी मार्गदर्शन करेंगी, यद्यपि नए क़ानून के तहत न्यायालयों को इसकी पुष्टि करनी होगी।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पुलिस किसी भी ज़ब्त संपत्ति को स्थायी रूप से अपने पास रख सकती है या बेच सकती है।

    तथ्य: सस्ती, शीघ्र नष्ट होने वाली और अज्ञात स्वामी वाली वस्तुओं के संकीर्ण अपवाद को छोड़कर, ज़ब्त संपत्ति की सूचना मजिस्ट्रेट को देना अनिवार्य है, और उसका अंतिम निस्तारण (वापसी, नीलामी, साक्ष्य के रूप में उपयोग) न्यायालय तय करता है—केवल पुलिस नहीं।

  • मिथक: यह धारा पुलिस को घरों या ज़मीन जैसी अचल संपत्ति को भी उसी तरह ज़ब्त करने देती है जैसे चोरी का माल ज़ब्त किया जाता है।

    तथ्य: समतुल्य दंप्रसं प्रावधान की न्यायिक व्याख्या (Nevada Properties, 2019) के अनुसार, अचल संपत्ति को इस प्रकार की शक्ति के तहत भौतिक रूप से ‘ज़ब्त’ नहीं किया जा सकता; पुलिस अधिकतम उसके हस्तांतरण पर रोक लगा सकती है, भूमि या भवन का कब्ज़ा नहीं ले सकती।