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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 85

Husband or relative of husband of a woman subjecting her to cruelty

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान भारतीय दंड संहिता की धारा 498A की परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसे 1983 में दहेज मृत्यु और विवाहित स्त्रियों पर घरेलू हिंसा के बढ़ते सार्वजनिक चिंता के बीच लाया गया था। इसका उद्देश्य पतियों और ससुराल पक्ष द्वारा की गई क्रूरता के विरुद्ध स्त्रियों को एक विशिष्ट आपराधिक उपाय देना था, यह मानते हुए कि ऐसा अत्याचार अक्सर वैवाहिक घर की निजता में होता था और सामान्य मारपीट के कानूनों के तहत दंडित नहीं हो पाता था।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें लंबे समय से इस प्रावधान के दुरुपयोग के प्रति सावधान करती रही हैं, विशेषकर आई.पी.सी. की धारा 498A के दौर में, यह देखते हुए कि दूर के रिश्तेदारों पर अस्पष्ट या व्यापक आरोपों से अनावश्यक गिरफ्तारियाँ हो जाती थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने Arnesh Kumar v. State of Bihar (2014) जैसे मामलों में निर्देश दिया कि पुलिस स्वतः गिरफ्तारी न करे और पहले यह परखे कि गिरफ्तारी वास्तव में आवश्यक है या नहीं। अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘क्रूरता’ ठोस और गंभीर होनी चाहिए—साधारण वैवाहिक अनबन या तुच्छ झगड़े इसके दायरे में नहीं आते। चूँकि धारा 85 BNS का शब्दांकन पहले के प्रावधान से काफ़ी मिलता-जुलता है, ये न्यायिक सिद्धांत इसके अर्थ-निर्णयन में आगे भी मार्गदर्शन करने की अपेक्षा है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: गलत: किसी भी पति-पत्नी के झगड़े में इस कानून के तहत गिरफ़्तारी हो सकती है।

    तथ्य: अदालतों ने माना है कि केवल गंभीर और ठोस क्रूरता—साधारण वैवाहिक मतभेद नहीं—ही इसके अंतर्गत आती है, और पुलिस को गिरफ्तार करने से पहले आवश्यकता का मूल्यांकन करना होता है (जैसा कि Arnesh Kumar v. State of Bihar, 2014 में रेखांकित किया गया)।

  • मिथक: गलत: यह धारा केवल शारीरिक हिंसा को कवर करती है।

    तथ्य: सही: क्रूरता में केवल शारीरिक उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, धमकी, या दहेज के लिए दबाव डालना भी शामिल हो सकता है।

  • मिथक: गलत: पति के सभी रिश्तेदार स्वतः ही उत्तरदायी होते हैं।

    तथ्य: सही: अदालतें प्रत्येक अभियुक्त के विरुद्ध क्रूरता के विशिष्ट कृत्यों का सबूत चाहती हैं; विस्तारित परिवार के विरुद्ध समग्र/चौड़े आरोपों की सामान्यतः कड़ी जाँच-परख की जाती है।