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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 50

Punishment of abetment if person abetted does act with different intention from that of abettor

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह नियम (भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 111 से आगे बढ़कर भारतीय न्याय संहिता, 2023 में समाहित) इसलिए है क्योंकि उकसावे के क़ानून में उस व्यक्ति पर दायित्व तय करना होता है जो अपराध कराता या उसमें सहायता करता है, भले ही वास्तविक कर्ता की मानसिक स्थिति उकसाने वाले की अपेक्षा से भिन्न हो। इस नियम के बिना, उकसाने वाला केवल इस वजह से उपयुक्त दंड से बच सकता था कि जिस व्यक्ति को उसने उकसाया उसने अलग, संभवतः कम या भिन्न, मानसिक अवस्था में काम किया। यह प्रावधान उकसाने वाले की सज़ा को उकसावे के समय उसकी अपनी मंशा या जानकारी से जोड़ता है, ताकि क़ानून वास्तविक कर्ता की बदली हुई मानसिकता से उकसाने वाले को लाभ न लेने दे।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समान पूर्ववर्ती प्रावधान (धारा 111, IPC) के तहत, न्यायालयों ने सामान्यतः माना है कि यह धारा तब लागू होती है जब वास्तविक कृत्य तो उकसावे से संबद्ध रहता है, पर कर्ता की मानसिक अवस्था उकसाने वाले की मंशा/ज्ञान से अलग हो जाती है। न्यायालयों ने इसे उन परिस्थितियों से अलग बताया है जहाँ किया गया कृत्य उस कृत्य से प्रकृति में सर्वथा भिन्न हो जिसे उकसाया गया था (जिसका विनियमन संभावित परिणामों पर आधारित एक संबंधित किन्तु पृथक प्रावधान द्वारा किया जाता है)। न्यायिक व्याख्या ने उजागर किया है कि उकसाने वाले की देयता उसकी स्वयं की दोषपूर्ण मानसिक अवस्था से बंधी रहती है, जो इस सिद्धान्त को सुदृढ़ करती है कि उकसावे में आपराधिक उत्तरदायित्व परिणाम पर नहीं बल्कि उकसाने वाले की योजना पर नज़र रखता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: उकसाने वाले को हर हाल में वास्तविक कर्ता के समान ही दंड नहीं मिलता।

    तथ्य: यह धारा स्पष्ट करती है कि वास्तविक कर्ता की मंशा या जानकारी भिन्न होने पर भी उकसाने वाले को उसकी अपनी मूल मंशा या जानकारी के अनुसार दंडित किया जाएगा।

  • मिथक: यह धारा उन स्थितियों को कवर करती है जहाँ जो अपराध घटित होता है वह नियोजित अपराध से पूरी तरह भिन्न हो।

    तथ्य: यह धारा विशेष रूप से उसी सामान्य कृत्य के भीतर मंशा या ज्ञान के अंतर से सम्बंधित है; सर्वथा अलग कृत्य या अपराध प्रायः उकसावे के संभावित परिणामों पर आधारित पृथक प्रावधान के अन्तर्गत आता है।