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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 358

Repeal and savings

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह एक मानक ‘निरस्तीकरण एवं संरक्षण’ उपधारा है, जिसकी आवश्यकता तब पड़ती है जब किसी पुराने कानून का स्थान नया कानून लेता है। यह सुचारु विधिक संक्रमण सुनिश्चित करती है: डेढ़ सदी पुरानी भारतीय दंड संहिता के अधीन उत्पन्न मामले, जांचें और अधिकार, भारत के सामान्य दंड विधान के रूप में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के क्षण मात्र से न तो लुप्त हों और न ही विधिक रूप से निष्प्रभावी हो जाएँ, जिससे देशभर में लंबित दशकों-हज़ार अभियोजन और अर्जित अधिकारों में अराजकता से बचाव हो।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: आईपीसी के निरस्त होते ही उसके अधीन लंबित सभी मामले और सजाएँ निष्प्रभावी नहीं हो जातीं।

    तथ्य: यह धारा विशेष रूप से पुरानी आईपीसी के अधीन उत्पन्न लंबित जांचों, मुकदमों, अधिकारों और दंडों को संरक्षित करती है, और उन्हें ऐसे ही जारी रहने देती है मानो आईपीसी अब भी प्रभाव में हो।