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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 299

Deliberate and malicious acts, intended to outrage religious feelings of any class by

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

प्रसिद्ध पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A के अनुरूप, यह प्रावधान सांप्रदायिक अशांति भड़का सकने वाले जानबूझकर, दुर्भावनापूर्ण हमलों से धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने का उद्देश्य रखता है, और साथ ही यह साबित करने की शर्त भी रखता है कि दुर्भावनापूर्ण तथा जानबूझकर का इरादा था, ताकि वास्तविक आलोचना, शैक्षणिक विमर्श, या ऐसी व्यंग्य रचनाएँ जिनमें ऐसा इरादा न हो, अपने आप अपराध न ठहरें।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने लगातार माना है कि इस अपराध के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा आवश्यक है—सिर्फ चोट पहुँची भावनाएँ या वह आपत्तिजनक वक्तव्य जो ऐसे विशिष्ट इरादे के बिना दिए गए हों, जैसे शैक्षणिक आलोचना या कलात्मक अभिव्यक्ति, अपने आप इस धारा के दायरे में नहीं आते।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: किसी भी कथन से यदि धार्मिक भावनाएँ आहत हों, भले ही अनजाने में, तो भी यह धारा स्वतः दंडनीय नहीं बनाती।

    तथ्य: कानून विशेष रूप से यह मांग करता है कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा सिद्ध हो—अनजाने में हुई ठेस या ऐसे वास्तविक विद्वत्तापूर्ण समालोचनात्मक वक्तव्य जिनमें ऐसा इरादा न हो, सामान्यतः इस धारा से बाहर आते हैं।