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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 298

Injuring or defiling place of worship with intent to insult religion of any class

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान धार्मिक स्थलों और पवित्र वस्तुओं के जानबूझकर किए गए अपमान/अपवित्रीकरण को दंडित करके धार्मिक सद्भाव की रक्षा करता है—क्योंकि ऐसे कृत्य अक्सर सांप्रदायिक तनाव भड़काने और किसी धार्मिक समुदाय की भावनाएँ आहत करने के लिए किए जाते हैं।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने परंपरागत रूप से यह अपेक्षित किया है कि अपमान की मंशा का प्रमाण हो, या यह स्पष्ट ज्ञान हो कि कृत्य को धर्म के अपमान के रूप में देखा जाएगा; केवल किसी उपासना‑स्थल को हुई आकस्मिक क्षति को वे आपराधिक आचरण नहीं मानते।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: किसी धार्मिक संरचना को हुई कोई भी आकस्मिक क्षति इस धारा के अंतर्गत अपराध मानी जाती है।

    तथ्य: कानून यह अपेक्षा करता है कि या तो धर्म का अपमान करने की मंशा हो, या यह ज्ञान हो कि कृत्य को उसी रूप में देखा जाएगा—ऐसी मंशा या जानकारी के बिना हुई शुद्ध रूप से आकस्मिक क्षति इस धारा के अंतर्गत नहीं आती।