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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 245

Fraudulently suffering decree for sum not due

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान, जो पहले Indian Penal Code, 1860 की Section 208 था, सांठगांठ वाले या बनावटी वादों को निशाना बनाता है—जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी मित्र/संबंधी के नकली मुकदमे में हार जाता है, ताकि एक काग़ज़ी निर्णय बन सके जिसे संपत्तियाँ बाहर निकालने या किसी वास्तविक देनदार (creditor) के दावे को मात देने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि अदालत ने एक बार डिक्री पारित कर दी है, तो वह अनिवार्यतः प्रामाणिक मानी जाएगी और बाद में उसे छलपूर्ण कहकर चुनौती नहीं दी जा सकती—यह कथन गलत है।

    तथ्य: अदालतें उन डिक्रीयों को निरस्त/उलट सकती हैं जो सांठगांठ का परिणाम सिद्ध हों, और ऐसी छलपूर्वक डिक्री की व्यवस्था करना अलग से दंडनीय भी है।