Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023
धारा 24
Offence requiring a particular intent or knowledge committed by one who is intoxicated
In cases where an act done is not an offence unless done with a particular knowledge or intent, a person who does the act in a state of intoxication shall be liable to be dealt with as if he had the same knowledge as he would have had if he had not been intoxicated, unless the thing which intoxicated him was administered to him without his knowledge or against his will.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह उपबंध भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 86 के पुराने नियम को आगे बढ़ाता है। इसकी नीति दीर्घकाल से यही रही है कि लोग किसी कृत्य से पहले जान-बूझकर नशा कर लेने से आपराधिक दायित्व से नहीं बच सकें। साथ ही, यह उनकी रक्षा करता है जिन पर उनकी इच्छा के विरुद्ध नशा थोपा गया (उदा., बिना जानकारी के नशीला पदार्थ दिया गया)—ऐसे मामलों में उन्हें इस कड़े मानक पर नहीं कसा जाता।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय Basdev v. State of PEPSU (1956) ने स्पष्ट किया कि यह नियम विशेष रूप से ‘ज्ञान’ को स्थिर करता है—अदालतें मान लेंगी कि स्वेच्छापूर्वक मद्यपान करने वाले व्यक्ति को अपने कृत्य के स्वाभाविक परिणामों का ज्ञान था, भले ही वह इतनी मदहोश हो कि विशेष ‘आशय’ न बना सके। बाद के निर्णयों ने उन अपराधों के बीच भेद को परिष्कृत किया जिनमें केवल सामान्य ज्ञान काफी है (जहां नशा कोई बहाना नहीं) और जिनमें विशिष्ट आशय चाहिए (जहां चरम नशे की स्थिति में देखा जा सकता है कि वह विशेष आशय वास्तव में बना या नहीं)। अदालतों ने लगातार कहा है कि मात्र मद्यपान, अपने आप में, तब तक प्रतिरक्षण नहीं है जब तक वह अनैच्छिक न हो।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: नशे में होना मतलब आप पर अपराध का दोष नहीं लगाया जा सकता—यह कथन गलत है।
तथ्य: अदालतें स्वैच्छिक नशे को ‘ज्ञान’ की कमी का बहाना नहीं मानतीं—Basdev v. State of PEPSU (1956) जैसे निर्णयों के अनुसार आपको ऐसे आँका जाएगा मानो आप होश में थे।
मिथक: यह धारा नशे की अवस्था में किए गए सभी अपराधों को क्षमा कर देती है—यह गलत है।
तथ्य: यह प्रावधान केवल ‘ज्ञान’ के संदर्भ में नशे-आधारित बहाने को हटाता है; यदि नशीला पदार्थ व्यक्ति की जानकारी के बिना या उसकी इच्छा के विरुद्ध दिया गया हो, तो यह लागू नहीं होता।