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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 235

Using as true a certificate known to be false

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान धारा 234 के साथ मिलकर काम करता है: जहाँ वह धारा झूठा प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति को दंडित करती है, वहीं यह प्रावधान (पूर्व में भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 198) उस किसी भी व्यक्ति को दंडित करता है जो बाद में उस झूठे प्रमाणपत्र पर भरोसा करके उसे वास्तविक बताकर प्रस्तुत करता है, ताकि गढ़े गए आधिकारिक दस्तावेजों के निर्माता और उपयोगकर्ता—दोनों—उत्तरदायी ठहराए जा सकें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सिर्फ दस्तावेज़ गढ़ना ही गैरकानूनी है; किसी और द्वारा गढ़े हुए दस्तावेज़ का उपयोग करना सुरक्षित है।

    तथ्य: झूठे प्रमाणपत्र को जानबूझकर असली की तरह इस्तेमाल करना स्वयं में दंडनीय है, और इसका दंड स्तर झूठा साक्ष्य देने के बराबर है।