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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 234

Issuing or signing false certificate

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

प्रमाणपत्र (चिकित्सकीय प्रमाणपत्र, जन्म/मृत्यु प्रमाणपत्र, चरित्र प्रमाणपत्र और ऐसे अन्य दस्तावेज) प्रायः न्यायालयों एवं प्राधिकारियों द्वारा बिना अधिक जांच के प्रमाण के रूप में स्वीकार कर लिए जाते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वसनीय, आधिकारिक स्रोत से माना जाता है। यह प्रावधान, जो पहले Indian Penal Code, 1860 की धारा 197 था, पेशेवरों या अधिकारियों द्वारा इस विश्वास के दुरुपयोग—झूठे तथ्यों पर हस्ताक्षर करने—से बचाव करता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करना मात्र प्रशासनिक कार्य है और इसमें कोई आपराधिक जोखिम नहीं होता।

    तथ्य: जब प्रमाणपत्र को विधिक साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त होना हो, तब उसमें निहित महत्वपूर्ण झूठे तथ्यों को जानते-बूझते हस्ताक्षर करना, न्यायालय में झूठा साक्ष्य देने के समान दंडनीय है।