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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 209

Non-appearance in response to a proclamation under section 84 of Bharatiya Nagarik

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जब कोई अभियुक्त फरार हो जाता है और गिरफ़्तारी के लिए ढूँढने पर भी नहीं मिलता, तो कानून न्यायालय को यह अधिकार देता है कि वह एक सार्वजनिक प्रोक्लेमेशन जारी कर उसे नियत तिथि और स्थान पर उपस्थित होने का आदेश दे (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 के तहत; पुराने दंप्रसं धारा 82 का स्थान लेती है)। यह प्रावधान (पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धारा 174A, वर्ष 2005 में जोड़ी गई) उस प्रोक्लेमेशन की अवहेलना को अलग अपराध मानता है, ताकि फरार अभियुक्त केवल न्यायिक प्रक्रिया से बचने के कारण भी अतिरिक्त कानूनी परिणाम भुगतें, मूल आरोपों से इतर। ‘घोषित अपराधी’ के लिए कड़ी सज़ा इसलिए है क्योंकि न्यायालय की बार-बार, औपचारिक अवमानना को अधिक गंभीरता से लिया जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह दंड केवल तभी लागू होता है जब बाद में वह व्यक्ति मूल अपराध में दोषी सिद्ध हो जाए।

    तथ्य: इस धारा के तहत दी जाने वाली सज़ा प्रोक्लेमेशन के बाद उपस्थित न होने के लिए है, और यह मूल आपराधिक मामले के नतीजे से अलग और स्वतंत्र है।

  • मिथक: ‘घोषित अपराधी’ घोषित होना अपने-आप नहीं हो जाता, केवल प्रोक्लेमेशन चूक जाने भर से नहीं।

    तथ्य: यह केवल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 84 की उपधारा (4) के तहत न्यायालय की एक विशिष्ट आगे की घोषणा से होता है; मात्र अनुपस्थिति काफ़ी नहीं है।