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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 207

Preventing service of summons or other proceeding, or preventing publication thereof

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

न्याय व्यवस्था इस पर निर्भर करती है कि लोग वास्तव में आधिकारिक संचार — जैसे न्यायालयी समन, शासकीय नोटिस या सार्वजनिक उद्घोषणाएँ — प्राप्त करें, ताकि न्याय और प्रशासन निष्पक्ष रूप से चल सके। यह प्रावधान, पूर्व भारतीय दंड संहिता की धारा 173 से आगे बढ़ाया गया है, और इसका उद्देश्य लोगों को तामील करने वालों से बचकर, चिपकाए गए नोटिस फाड़कर, या आधिकारिक घोषणाएँ बाधित कर कानूनी प्रक्रिया से बच निकलने से रोकना है। ऐसे नियम के बिना, लोग काग़ज़ात लेने से इंकार करके या सेवा का प्रमाण नष्ट करके कार्यवाही को अनिश्चित काल तक टाल सकते थे या निष्फल कर सकते थे।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: आप केवल समन स्वीकार करने से इंकार करके किसी न्यायालयी मामले से बच नहीं सकते।

    तथ्य: जानबूझकर समन से बचना या उसे नष्ट करना स्वयं इस धारा के अंतर्गत एक पृथक अपराध है, और इससे मूल मामला रुकता नहीं है।

  • मिथक: सरकारी नोटिस फाड़ देना मात्र तोड़फोड़ नहीं है; यह कोई हल्की बात नहीं है।

    तथ्य: यदि विधिसम्मत सूचना या उद्घोषणा को रोकने के इरादे से ऐसा किया जाए, तो यह विशेष रूप से इस प्रावधान के तहत दंडनीय है; और यदि बात न्यायालय में हाज़िरी या दस्तावेज़ से संबंधित हो, तो दंड और अधिक है।