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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 205

Wearing garb or carrying token used by public servant with fraudulent intent

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान (पहले Indian Penal Code, 1860 की Section 140) वर्दियों और आधिकारिक प्रतीकों की प्राधिकारिता में जनता के भरोसे की रक्षा के लिए है। वर्दी और बैज संकेत देते हैं कि किसी व्यक्ति के पास सरकारी शक्तियाँ हैं — जैसे गिरफ्तार करना, निरीक्षण करना, शुल्क वसूलना, या नियमों को लागू करना। यदि कोई भी बिना परिणाम भुगते पुलिस की वर्दी या वन-रक्षक का बैज पहन सके, तो ठग लोग आधिकारिक अधिकार का ढोंग कर धन उगाही, अनुचित प्रवेश, या आम नागरिकों को डराने-धमकाने जैसे काम कर सकते हैं। इसलिए कानून केवल रूप-रंग से की जाने वाली प्रतिरूपण (impersonation) को अपराध मानता है, जो उस अधिक गंभीर अपराध से भिन्न है जिसमें कोई वास्तव में आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने का ढोंग करता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इस कानून के तहत दंडित होने के लिए आपको ज़रूरी है कि आप मौखिक रूप से अपने आपको लोक सेवक होने का दावा करें।

    तथ्य: कानून का ध्यान उस वेशभूषा को पहनने या प्रतीक साथ रखने पर है, जिसमें धोखा देने की नीयत हो या जिससे लोगों के धोखा खाने की प्रबल संभावना हो — मौखिक दावे आवश्यक नहीं हैं।

  • मिथक: नाटक या फैंसी-ड्रेस के लिए पुलिस की तरह दिखने वाला परिधान पहनना इस धारा के अंतर्गत अवैध है।

    तथ्य: इस धारा में यह अपेक्षित है कि व्यक्ति की नीयत हो, या उसे ज्ञान हो, कि लोग सचमुच उसे वही लोक सेवक समझेंगे; ऐसी नीयत के बिना, केवल हानिरहित परिधान का उपयोग सामान्यतः इस मानक को पूरा नहीं करता (सरलीकृत)।