Skip to content
सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 204

Personating a public servant

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान पुराने भारतीय दंड संहिता (Section 170) से चली आ रही उस नीति को आगे बढ़ाता है जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में जन-विश्वास की रक्षा करना था। यदि लोग बेधड़क अपने को अधिकारी — जैसे पुलिसकर्मी, कर अधिकारी, दंडाधिकारी आदि — बताकर उस झूठी पहचान के बल पर धन वसूलें, आज्ञापालन कराएँ या प्रवेश पाएँ, तो इससे जन-सुरक्षा और वास्तविक अधिकारियों पर भरोसा दोनों कमजोर पड़ेंगे। कानून केवल झूठ बोलने को नहीं, बल्कि उस झूठ के साथ उस नकली पद के ‘रंग’ में कोई वास्तविक कार्य करने को निशाना बनाता है, क्योंकि यही संयोजन वास्तविक हानि पहुँचाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सिर्फ अपने को लोक सेवक बताना, चाहे मज़ाक में ही क्यों न हो, इस कानून के तहत दंड पाने के लिए पर्याप्त है।

    तथ्य: इस धारा के अंतर्गत यह आवश्यक है कि व्यक्ति उस झूठे अधिकार के आधार पर कोई कार्य करे या करने का प्रयास करे — केवल कह देना, बिना उस पर अमल किए, इस विशिष्ट अपराध के लिए पर्याप्त नहीं है।

  • मिथक: यह कानून केवल पुलिस अधिकारियों का भेष धरने के मामलों को ही कवर करता है।

    तथ्य: यह किसी भी लोक पद का झूठा रूप धरने पर लागू होता है, केवल पुलिस तक सीमित नहीं — जैसे कर अधिकारी, दंडाधिकारी या अन्य शासकीय पद।