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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 201

Public servant framing an incorrect document with intent to cause injury

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 167 के दृष्टिकोण को भारतीय न्याय संहिता, 2023 में आगे बढ़ाता है। सार्वजनिक अभिलेख और आधिकारिक दस्तावेज़ (भूमि अभिलेख, न्यायालयीय कागजात, सरकारी आदेश, साक्ष्य के अनुवाद आदि) विश्वसनीय माने जाते हैं क्योंकि अपेक्षा होती है कि अधिकारी उन्हें शुद्ध रूप से तैयार करेंगे। यह कानून इसलिए है कि भ्रष्ट या लापरवाह अधिकारी नागरिकों को हानि पहुँचाने के इरादे से ऐसे दस्तावेज़ों में जानबूझकर तोड़-मरोड़ न करें, ताकि लोक प्रशासन की साख बनी रहे और उन लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें जो आधिकारिक अभिलेखों पर निर्भर हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कानून किसी भी दस्तावेज़ के लिए किसी भी सरकारी कर्मचारी पर लागू होता है।

    तथ्य: यह केवल उसी लोक सेवक पर लागू होता है जिसे उस विशेष दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख को तैयार करने या अनुवाद करने की आधिकारिक ज़िम्मेदारी सौंपी गई हो।

  • मिथक: किसी अधिकारी की ईमानदार भूल या टाइप की गलती को भी इस धारा के तहत दंडित किया जा सकता है।

    तथ्य: कानून यह अपेक्षा करता है कि अधिकारी को मालूम था या वह मानता था कि दस्तावेज़ गलत है और उसने हानि पहुँचाने का इरादा किया था, या उसे यह ज्ञात था कि हानि होने की प्रबल संभावना है—ऐसे सच्चे भूल-चूक वाले मामले, जिनमें ऐसा इरादा या ज्ञान न हो, इसके दायरे में नहीं आते।